जबसे ये सोशल मीडिया यानी कि व्हाट्सएप और फेसबुक आए हैं, ज्ञानियों की भरमार हो गई है।ज्ञानी भी तरह तरह के हैं।कुछ ज्ञानी वो हैं जो ज्ञान की हेरा फेरी करते हैं,सही समझे आप,यानी msg forward करने वाले।msg को थोड़ा सा पढ़ा और खिसकाया।बिना ये सोचे समझे कि ये सही भी है या नहीं।कोई ऐसा नुस्खा जो कि कैंसर भी तुरंत ठीक करने की गारंटी दे,कोई कोरोना न होने की गारंटी दे,तो फिर ज़्यादा देर करना उचित नहीं समझते।आखिर अपने चाहने वालों को कैंसर और कोरोना से बचाना जो है। चलिए अब दूसरे प्रकार के ज्ञानी जो कि राजनीतिक विश्लेषक कहलाते हैं।कुछ होते हैं मोदी भक्त तो कुछ राहुल भक्त।इनकी भक्ति इतनी अधिक होती है कि ये अपने खास मित्रो से भी लड़ भिड़ जाते हैं।कुछ भक्त क्रोध में आकर ग्रुप बहिर्गमन कर जाते हैं पर भक्ति पर आंच नहीं आने देते।इनमे से अधिकतर लोग राजनीतिक जानकारी में कमज़ोर होते हैं पर कट्टरता में मज़बूत।पर यही लोग ग्रुप में उधम मचाते हैं।अनुयायी बनिये,देश प्रेमी बनिये,इतिहास की भूगोल की जानकारी रखिये,पर कट्टरता ठीक नही भाई। मीडिया पर लड़े नहीं बल्कि जुड़ें।ज्ञानी बनकर शेख़ी न बघारें।बल्कि सही ज्ञान को स्वीकार करे...
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