Skip to main content

Posts

संतोषी सदा सुखी

क्या हमने कभी सोचा कि हम ईश्वर से हमेशा मांगते ही क्यों हैं??क्या हमने कभी उसे कुछ देने का भी प्रयास किया,या वादा किया।आप सोच सकते हो कि हम क्या कर सकते हैं भला!! कर सकते हैं,हम ईश्वर की दी हुई प्रकृति को साफ सुंदर सुरक्षित रखने का वादा कर सकते हैं ।बेहद गरीब को कुछ देंगे या सेवा करेंगे तो ईश्वर को देंगे।पशु पक्षियों से प्रेम यानी ईश्वर से प्रेम।जब भी ईश्वर के आगे हाथ जोड़ो तो सिर्फ़ मांगो मत।जो मिला है उसका धन्यवाद करो।जो है उसका ख़याल रखो। संतोषी सदा सुखी। सुप्रभात।जय श्री कृष्णा।।
Recent posts

सोशल मीडिया की ख़याली दुनिया

प्रिय मित्रों,बहुत समय से मैं देख रहा हूँ कि सोशल मीडिया के कारण एक बहुत बड़ा तबका एक खयाली दुनिया मे जी रहा है।लोगो से वास्तविक मित्रता नही बल्कि वर्चुअल मित्रता रख कर स्वयं को आंकता है।जिसके जितने ज्यादा virtual friends वह उतना ही अधिक गुरुर में।अब ये अलग बात है कि वक़्त आने पर virtual नही बल्कि real friends और रिश्तेदार ही साथ देते हैं।लेकिन शायद बहुत से लोगो के लिए ये स्टेटस सिंबल है।आपकी किसी पोस्ट को कितने likes मिलते हैं इससे भी आप खुश या दुखी रहते हैं।जबकि ख़ुश व दुःखी होने के जीवन मे कई कारण होते हैं,हमारे आस पास। बहुत से लोग रोज़ कुछ न कुछ पोस्ट कर अपनी एक virual image इस virtual दुनिया मे प्रस्तुत करते रहते हैं।और फुरसती लोग उन्हें like या comments करके महान विचारक और चिंतक की उपाधि देते है,इस लालच में कि बदले में उन्हें भी महान बन जाने का अवसर प्राप्त होगा। इस वर्चुअल दुनिया ने कई संबंधों को कमज़ोर किया हैं।कई बच्चों का भविष्य बिगाड़ दिया है।दरअसल कोई भी व्यक्ति जब सोशल मीडिया पर महान करार दे दिया जाता है तो फिर वो उस गुरुर में अन्य संबंधों को तुच्छ समझने लगता है।सोशल मीडिया प...

कोरोना से बचाव के लिए अब कठोर अर्थ दंड भी ज़रूरी

कोरोना की दूसरी लहर ने लाखों लोगों की जान ली।हॉस्पिटल्स में बेड के अभाव में,ऑक्सीजन के अभाव में,दवाओं के अभाव में कितने ही लोग असमय मौत के आगोश में सो गए।पीछे से उनके परिजनों पर दुःखो का पहाड़ टूट पड़ा।न जाने उन पर क्या बीती,और क्या बीत रही है।उनमें कई तो बच्चे हैं जिनके माता पिता दोनो चले गए। अब अनलॉक होने पर फिर से लोग असावधानी रख रहे हैं।इससे हमे फिर एक और लहर झेलना पड़ सकती है।लंबे समय से,जो ज़रूरी सावधानियां रखनी हैं उस पर खूब प्रचार प्रसार हो गया।लेकिन अधिकांश लोग मानते नही। अब एकमात्र रास्ता है कठोर दंड का।मास्क न लगाने पर कम से कम 500 रु का दंड,व्यक्तिगत रूप से करना चाहिये,गंभीरता से।और बड़े बड़े प्रतिष्ठानो में जहाँ मास्क न लगाते लोग,व विक्रेता दिखें,तो उनके ख़िलाफ़ 5000 के दंड का आदेश हो।अगर इस व्यवस्था को कठोरता से लागू किया गया तो लोग अवश्य ही कुछ सुधरेंगे।क्योकि हम लोग सीधे सीधे नियम में चलना पसंद ही नही करते हैं। समझाइश बहुत हो गई,अब दंड की बहुत जरूरत है।
JAL MAHAL as seen from Nahar Garh 

हरफनमौला संगीतकार आर डी बर्मन को श्रद्धांजलि।

यम्मा यम्मा,यम्मा यम्मा,ये खूबसूरत समां,, तुम क्या जानो मुहब्बत क्या है,,महबूबा ओ महबूबा,गोलमाल है भई सब गोलमाल है,जैसे मस्त मस्त गीतों के संगीतकार और गायक श्री आर डी बर्मन दा का आज जन्मदिन है।उनको हार्दिक श्रद्दांजलि। Search R. D. Burman Language Download PDF Watch Edit Rahul Dev Burman  (27 June 1939 – 4 January 1994) was an  Indian   music director . From the 1960s to the 1990s, Burman composed musical scores for 331 films. [1]  Burman did major work with his wife,  Asha Bhosle  and  Kishore Kumar  and scored many of the songs that made these singers famous. He has also scored many songs sung by his sister-in-law,  Lata Mangeshkar . Nicknamed  Pancham , he was the only son of the composer  Sachin Dev Burman . R. D. Burman Born Rahul Dev Burman 27 June 1939 Calcutta ,  Bengal Province ,  British India  (present-day  Kolkata ,  West Bengal ,  India ) Died 4 January 1994 (aged 54) ...

चीनी वस्तुओं का बहिष्कार

प्रिय मित्रों,कोरोना संकट के जनक धूर्त और चालक चीन,इस कठिन समय का फ़ायदा उठाने की सोच के साथ हमारी धरती और कब्ज जमाने की फिराक में है।अन्य छोटे देशों को तो गुलाम बना ही रहा है।अब हमारे लिए ये बहुत ज़्यादा ज़रूरी हो गया है कि हम चीन में बने समान न खरीदे।चीनी apps भी प्रयोग न करें अब जब भी मोबाइल लें,तो देखें कि वो चीन का न हो।चीन के साथ सीमा विवाद क्यो है,कौन जिम्मेदार है,ये भी समझें, इतिहास को पढ़ें।और ऐसे नेताओं व पार्टी को भी देश की राजनीति से निकाल बाहर करें। जय हिंद।जय हिंद की सेना।

सोशल मीडिया ज्ञानी

जबसे ये सोशल मीडिया यानी कि व्हाट्सएप और फेसबुक आए हैं, ज्ञानियों की भरमार हो गई है।ज्ञानी भी तरह तरह के हैं।कुछ ज्ञानी वो हैं जो ज्ञान की हेरा फेरी करते हैं,सही समझे आप,यानी msg forward करने वाले।msg को थोड़ा सा पढ़ा और खिसकाया।बिना ये सोचे समझे कि ये सही भी है या नहीं।कोई ऐसा नुस्खा जो कि कैंसर भी तुरंत ठीक करने की गारंटी दे,कोई कोरोना न होने की गारंटी दे,तो फिर ज़्यादा देर करना उचित नहीं समझते।आखिर अपने चाहने वालों को कैंसर और कोरोना से बचाना जो है। चलिए अब दूसरे प्रकार के ज्ञानी जो कि राजनीतिक विश्लेषक कहलाते हैं।कुछ होते हैं मोदी भक्त तो कुछ राहुल भक्त।इनकी भक्ति इतनी अधिक होती है कि ये अपने खास मित्रो से भी लड़ भिड़ जाते हैं।कुछ भक्त क्रोध में आकर ग्रुप बहिर्गमन कर जाते हैं पर भक्ति पर आंच नहीं आने देते।इनमे से अधिकतर लोग राजनीतिक जानकारी में कमज़ोर होते हैं पर कट्टरता में मज़बूत।पर यही लोग ग्रुप में उधम मचाते हैं।अनुयायी बनिये,देश प्रेमी बनिये,इतिहास की भूगोल की जानकारी रखिये,पर कट्टरता ठीक नही भाई। मीडिया पर लड़े नहीं बल्कि जुड़ें।ज्ञानी बनकर शेख़ी न बघारें।बल्कि सही ज्ञान को स्वीकार करे...