प्रिय मित्रों,बहुत समय से मैं देख रहा हूँ कि सोशल मीडिया के कारण एक बहुत बड़ा तबका एक खयाली दुनिया मे जी रहा है।लोगो से वास्तविक मित्रता नही बल्कि वर्चुअल मित्रता रख कर स्वयं को आंकता है।जिसके जितने ज्यादा virtual friends वह उतना ही अधिक गुरुर में।अब ये अलग बात है कि वक़्त आने पर virtual नही बल्कि real friends और रिश्तेदार ही साथ देते हैं।लेकिन शायद बहुत से लोगो के लिए ये स्टेटस सिंबल है।आपकी किसी पोस्ट को कितने likes मिलते हैं इससे भी आप खुश या दुखी रहते हैं।जबकि ख़ुश व दुःखी होने के जीवन मे कई कारण होते हैं,हमारे आस पास।
बहुत से लोग रोज़ कुछ न कुछ पोस्ट कर अपनी एक virual image इस virtual दुनिया मे प्रस्तुत करते रहते हैं।और फुरसती लोग उन्हें like या comments करके महान विचारक और चिंतक की उपाधि देते है,इस लालच में कि बदले में उन्हें भी महान बन जाने का अवसर प्राप्त होगा।
इस वर्चुअल दुनिया ने कई संबंधों को कमज़ोर किया हैं।कई बच्चों का भविष्य बिगाड़ दिया है।दरअसल कोई भी व्यक्ति जब सोशल मीडिया पर महान करार दे दिया जाता है तो फिर वो उस गुरुर में अन्य संबंधों को तुच्छ समझने लगता है।सोशल मीडिया पर उसके व्यवहार और वास्तविक जीवन मे व्यवहार में और कार्यप्रणाली में बहुत अंतर होता है।ये सिर्फ़ वही नोट कर सकता है जो उसके साथ दिन रात रहता है।मैंने बहुत से ऐसे लेखक और कलाकारों के बारे में सुना,पढ़ा है कि वे अपने वास्तविक जीवन मे असफ़ल रहे हैं।लेकिन अपनी लेखनी से बहुत ही महान समझे गए।
मुझे लगता है कि सोशल मीडिया और actual life में बड़ा अंतर है।और हर इंसान को मीडिया का प्रयोग इतना अधिक नही करना चाहिए कि उससे जुड़े लोग मानसिक कष्ट भोगें।
बहुत से लोग रोज़ कुछ न कुछ पोस्ट कर अपनी एक virual image इस virtual दुनिया मे प्रस्तुत करते रहते हैं।और फुरसती लोग उन्हें like या comments करके महान विचारक और चिंतक की उपाधि देते है,इस लालच में कि बदले में उन्हें भी महान बन जाने का अवसर प्राप्त होगा।
इस वर्चुअल दुनिया ने कई संबंधों को कमज़ोर किया हैं।कई बच्चों का भविष्य बिगाड़ दिया है।दरअसल कोई भी व्यक्ति जब सोशल मीडिया पर महान करार दे दिया जाता है तो फिर वो उस गुरुर में अन्य संबंधों को तुच्छ समझने लगता है।सोशल मीडिया पर उसके व्यवहार और वास्तविक जीवन मे व्यवहार में और कार्यप्रणाली में बहुत अंतर होता है।ये सिर्फ़ वही नोट कर सकता है जो उसके साथ दिन रात रहता है।मैंने बहुत से ऐसे लेखक और कलाकारों के बारे में सुना,पढ़ा है कि वे अपने वास्तविक जीवन मे असफ़ल रहे हैं।लेकिन अपनी लेखनी से बहुत ही महान समझे गए।
मुझे लगता है कि सोशल मीडिया और actual life में बड़ा अंतर है।और हर इंसान को मीडिया का प्रयोग इतना अधिक नही करना चाहिए कि उससे जुड़े लोग मानसिक कष्ट भोगें।
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