कोरोना की दूसरी लहर ने लाखों लोगों की जान ली।हॉस्पिटल्स में बेड के अभाव में,ऑक्सीजन के अभाव में,दवाओं के अभाव में कितने ही लोग असमय मौत के आगोश में सो गए।पीछे से उनके परिजनों पर दुःखो का पहाड़ टूट पड़ा।न जाने उन पर क्या बीती,और क्या बीत रही है।उनमें कई तो बच्चे हैं जिनके माता पिता दोनो चले गए। अब अनलॉक होने पर फिर से लोग असावधानी रख रहे हैं।इससे हमे फिर एक और लहर झेलना पड़ सकती है।लंबे समय से,जो ज़रूरी सावधानियां रखनी हैं उस पर खूब प्रचार प्रसार हो गया।लेकिन अधिकांश लोग मानते नही। अब एकमात्र रास्ता है कठोर दंड का।मास्क न लगाने पर कम से कम 500 रु का दंड,व्यक्तिगत रूप से करना चाहिये,गंभीरता से।और बड़े बड़े प्रतिष्ठानो में जहाँ मास्क न लगाते लोग,व विक्रेता दिखें,तो उनके ख़िलाफ़ 5000 के दंड का आदेश हो।अगर इस व्यवस्था को कठोरता से लागू किया गया तो लोग अवश्य ही कुछ सुधरेंगे।क्योकि हम लोग सीधे सीधे नियम में चलना पसंद ही नही करते हैं। समझाइश बहुत हो गई,अब दंड की बहुत जरूरत है।
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