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संतोषी सदा सुखी

क्या हमने कभी सोचा कि हम ईश्वर से हमेशा मांगते ही क्यों हैं??क्या हमने कभी उसे कुछ देने का भी प्रयास किया,या वादा किया।आप सोच सकते हो कि हम क्या कर सकते हैं भला!! कर सकते हैं,हम ईश्वर की दी हुई प्रकृति को साफ सुंदर सुरक्षित रखने का वादा कर सकते हैं ।बेहद गरीब को कुछ देंगे या सेवा करेंगे तो ईश्वर को देंगे।पशु पक्षियों से प्रेम यानी ईश्वर से प्रेम।जब भी ईश्वर के आगे हाथ जोड़ो तो सिर्फ़ मांगो मत।जो मिला है उसका धन्यवाद करो।जो है उसका ख़याल रखो। संतोषी सदा सुखी। सुप्रभात।जय श्री कृष्णा।।